भारतीय संस्कृति की पुनर्सथापना में कलाकारों का योगदान

तुमसर- सेवाकेंद्र की और से दि. २४-०९-२०१७ को गभने सभागृह में कला-संस्कृति प्रभाग द्वारा भारतीय संस्कृति की पुनार्थपना में कलाकारों का योगदान यह कार्यक्रम सफलता पूर्ण सम्पन हुआ, जिसका उदघाटन नगराघ्यश भ्राता प्रदीपभाऊ पडोडे के द्वारा किया गया.कार्यक्रम के अध्कश भ्राता तारीकभाई कुरेशीजी थे.प्रमुख वक्ता माउन्ट आबू से पधारे भ्राता दयालजी तथा भ्राता सतिशजी जो कला –संस्कृति प्रभाग मुख्यालय सयोजक है.कार्यकम में आशीर्वचन राष्ट्रिय सयोजिका आदरनिय कुसुम दीदीजी ने वेक्त किये, दीदीजी ने बताया की भारत की संस्कृति अति महान है, कला का अर्थ सिर्फ मनोरंजन नहीं है, परंतु आधयात्मिक मूल्यों को अपनाकर कर्म करना भी वास्तव में जीवन जीने की कला है.

    भ्राता दयालजी ने प्रभाग का उदेद्श बताया की हर मनुष्य अपने आपको जाने-पह्जाने ही हर व्यक्ती कलाकार है. भ्राता सतीशजी ने वर्तमान संसार और आदि संस्कृति की बात करते हुये कहा अब भारत को फिर से देवभूमि बनाना है तो बिना आध्यात्मिकता के नहीं हो सकता. इस प्रोग्राम में चार चाँद लगाये भ्राता युगरतन जो की छत्तीसगड के राष्ट्रीय गायक के रूप में पुरस्कृत है, जिन्होंने अपनी सुरीली, सुमधुर आवाज से सभा को मंत्रमुग ‍कर दिया.

     तुमसर सेवाकेंद की संचालिका ब्र.कु. शक्ति बहन ने सभी का स्वागत किया, वरठी सवाकेंद्र संचालिका ब्र.कु उषादिदी ने संस्था का परिचय देते हुये बताया की इस इस संस्था का उद्देश राजयोग के अभ्यास से मानव को मनुष्य से देवता बनाना है.

   इस समय मंच पर नगर के प्रतिठीत नागरिक भ्राता शंकर जैसवाल, भ्राता अनिल गभने, भ्राता राजेश पारधी ,बहन मीरा भट, बहन रितु पाशिने,बहन प्रिया बडवाईक, बहन गीता कोंड़ेवार भी उपस्तिथ थे.

   कामटी सेवाकेंद्र सांचालिका ब्र.कु. प्रेमलता दीदी ने बहोत ही सुंदर मंच सांचालन किया तथा शिवशक्ति डांस ग्रुप द्वारा रंगारग आध्यात्मिक गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किये गये.नागरिको ने इस कार्यक्रम को प्रचंड प्रतिसाद दिया. अंत में आमत्रित कलाकारों को मोमंन्टो एव प्रमाण पत्र दिए गये. कार्यक्रम पशचात सभी को धन्यवाद् देते हुये महाप्रसाद दिया गया

 

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